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गुरुवार, जनवरी 21, 2021

गज़ल|| जिंदगी देता है इक रोज मार देने को


 -अतुल कन्नौजवी

इश्क़ ही काफ़ी है इक जान वार देने को

गुजरता वक्त है सबकुछ गुजार देने को


फरिश्ते सीढ़ियां लेकर छतों पे चढते रहे
फलक से चांद सितारे उतार देने को,

अजीब खेल है दुनिया बनाने वाले का
जिंदगी देता है इक रोज मार देने को

सुकून दे दिया रातों की नींद भी दे दी
बचा ही क्या है अब तुमको उधार देने को

मैं हूं पतझड कि परिंदों से गुजारिश है मेरी
मैं आ रहा हूं मौसमे बहार देने को,

हवा खिलाफ सही फिर भी नफरतों के बीच
कहीं से कोई तो आएगा प्यार देने को

मुझे लगा कि साथ उम्रभर निभाएगा
वो मेरे पास आया इंतजार देने को

हवा में हाथ उठाते रहे कई मुफ़लिस
दुआएं दिल से मुझे बार—बार देने को

छुअन तो छोडिए मेरी नज़र ही काफ़ी है
हुस्न को तेरे जादुई निखार देने को।।

गज़ल| अब मुझे अच्छा नहीं लगता जमींदारों के बीच

शायर अतुल कन्नौजवी

- अतुल कन्नौजवी

ऐ फलक थोडी जगह मुझको भी दे तारों के बीच
अब मुझे अच्छा नहीं लगता जमींदारों के बीच

सच कई दिन तक रखा रहता है बाजारों के बीच
झूठ बिक जाता है पलभर में खरीदारों के बीच

मुल्क में हरेक सूबे में, यहां तक हर जगह
बेवकूफों की हुकूमत है समझदारों के बीच

इक बचाती जिंदगी तो दूसरी लेती है जान
फासला कितना बड़ा है ढाल—तलवारों के बीच

जैसे—जैसे रुख बदलती है हमारी जिंदगी
हम उलझते जा रहे हैं अपने किरदारों के बीच

खुशबुएं लेकर भी किस्मत की चुभन सहते हुए
गुल हमेशा मुस्कराया करते हैं खारों के बीच।।

मंगलवार, जनवरी 19, 2021

(गज़ल) दिल का इक ख़्वाब दिल में दबा रह गया

दूरदर्शन पर काव्य पाठ करते अतुल कन्नौजवी
दूरदर्शन पर कार्यक्रम का संचालन करते शायर अतुल कन्नौजवी
 व कार्यक्रम में शामिल अन्य शोअरा।

दिल का इक ख़्वाब दिल में दबा रह गया
मैं उसे उम्रभर चाहता रह गया,

उसके जैसा कोई भी दिखा ही नहीं
जिसकी तस्वीर मैं देखता रह गया,

शाम होते ही वो याद आने लगा
फिर उसे रातभर सोचता रह गया,

मुझसे मिलने वो आया चला भी गया
शह्र में मैं उसे ढूंढ़ता रह गया,

उसके बारे में अब याद कुछ भी नहीं
एक बस याद उसका पता रह गया,

वो किसी के फ़लक का सितारा बना
मैं दुआ में जिसे मांगता रह गया।।
                                       # अतुल कन्नौजवी

गुरुवार, जनवरी 14, 2021

(गज़ल) कतरे को भी दरिया बोला जाता है...


इश्क में मुझको क्या क्या बोला जाता है
बेबी बाबू सोना बोला जाता है

लाख सितारों में भी चमक उसी की है
तभी चांद को तन्हा बोला जाता है

बगैर तेरे अब तो जीना मुश्किल है
प्यार में अक्सर ऐसा बोला जाता है

इश्क जिंदगी में चाहे कितने भी कर
लेकिन सबको पहला बोला जाता है

सहराओं में प्यास बुझाने की खातिर
कतरे को भी दरिया बोला जाता है

इश्क में तब हैरानी होती है मुझको
जब बूढों को बच्चा बोला जाता है।।
                                                 (अतुल कन्नौजवी)